Thursday, 13 April 2017

देखो वक़्त बदल रहा है,
बिल्कुल तुम्हारी तरह. 



Tuesday, 21 March 2017

कई आए, कई गये.
पर जो ना जा सका वो.... "तुम" हो. 

 


कभी सोचता हू लिख दू तुम पर कोई किताब,
फिर लगता है तुम्हारा ज़िक्र सिर्फ़ खुद से ही हो तो बेहतर.

 

 Abhideep Roy

Friday, 17 March 2017


दिल की दीवारों में बैठ गई आँखों की नमी आज फिर
मुझे बहुत खल रही है ज़िन्दगी में तेरी कमी आज फिर



Wednesday, 15 March 2017

Abhideep Roy Shayri

मेरा चेहरा नही, मेरी जिंदगी मे रंग भरो
तब मानु हप्पी होली


Tum mere baare me utna hi jante ho
Jitna me chahta hu tum jano.


 

Thursday, 9 March 2017